“Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari” is a popular sentiment echoed in many Urdu and Hindi shayaris, reflecting the growing materialism and selfishness in today’s world. Literally translated, it means “This is a selfish world driven by money.” Shayari, a poetic form rich in emotion and cultural significance, often captures the deeper realities of life, and this particular theme has struck a chord with many.
In a world increasingly dominated by wealth, status, and possessions, human values such as love, empathy, and trust are often pushed aside. Shayars (poets) use this theme to express their disillusionment with society, highlighting how relationships are now measured not by emotional depth but by financial worth. Many shayaris in this genre lament how people change with circumstances—how friends disappear in tough times and only return when success or money is involved.
These verses not only express frustration but also serve as a wake-up call. They remind readers to evaluate their own priorities and behavior. The beauty of such shayari lies in its emotional honesty—it captures the pain of betrayal, the loneliness of true-hearted individuals in a superficial world, and the longing for sincerity.
Selfish Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

इस दुनिया में लोग रिश्ते भी पैसों से तौलते हैं,
जहाँ रिश्तों का भी अब कोई कद नहीं, बस पैसों का बोलबाला है।
लोग कहते हैं वफादारी सबसे बड़ी होती है,
पर इस मतलबी दुनिया में वो पैसों से ही मापी जाती है।
यहाँ सबको अपनी ही परवाह है, चाहे दिल कितना भी टूटे,
इस दुनिया में प्यार से ज्यादा पैसों की है चाहत।
लोग कहते हैं पैसा कुछ नहीं करता,
पर सच्चाई ये है कि आजकल वही सब कुछ करता है।
इंसान रिश्तों की अहमियत भूल चुका है,
यहाँ पैसों के बिना किसी की कीमत नहीं है।
मोहब्बत अब पैसों की सूरत में बेमानी हो गई है,
इस दुनिया में अब ख्वाब भी पैसे के पीछे दौड़ते हैं।
हर किसी को अपनी ही फिक्र है, चाहे दुनिया जलती रहे,
इस मतलबी दौर में प्यार भी अब पैसों के आगे बेमतलब है।
रिश्ते अब धन-दौलत से खरीदे जाते हैं,
अब तो प्यार भी पैसों की नजर से ही देखे जाते हैं।
इस पैसे की दुनिया में दिल से कुछ नहीं बिकता,
यहाँ सबकुछ रुपये-पैसे से ही तौला जाता है।
अब रिश्तों का क्या है, यहाँ तो पैसे की ही बात होती है,
दिल का क्या, वो तो बस दिखावा होता है, फिर प्यार भी बिकता है।
Rishte Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

इस दुनिया में रिश्ते अब पैसों से बनते हैं,
जहाँ दिलों की जगह बस चेक और नोट चलते हैं।
रिश्तों की अहमियत अब पैसों से तौली जाती है,
यहाँ प्यार भी रुपये के हिसाब से मापी जाती है।
लोगों को अब रिश्तों से ज्यादा पैसों की चाहत है,
दिलों में जगह नहीं, बस दौलत की बात है।
आजकल लोग रिश्ते नहीं, पैसों के पीछे भागते हैं,
दिल की बातों से ज्यादा अब ये पैसों के धागे बांधते हैं।
रिश्तों का अब कोई वजूद नहीं, सब पैसों में रंग जाते हैं,
दिलों की सच्चाई को लोग अब पैसे के वश में ढलते हैं।
इस दुनिया में रिश्ते भी स्वार्थ से भरे हैं,
जहाँ दिलों की जगह पैसों की आवाज़ है।
आजकल रिश्ते पैसों की वजह से बने रहते हैं,
वरना दिल से किसी को अब क्या मतलब रहता है।
इस मतलबी दुनिया में रिश्ते सिर्फ तब तक होते हैं,
जब तक हमारी जेब में पैसा रहता है।
लोग कहते हैं प्यार बिना पैसों के भी हो सकता है,
पर सच ये है कि रिश्ते पैसों से ही निभाए जाते हैं।
अब रिश्तों में प्यार नहीं, केवल फायदों की बात होती है,
यहाँ दिल से ज्यादा पैसों की अहमियत होती है।
Family Rishte Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

इस दुनिया में रिश्ते अब पैसों से जुड़े होते हैं,
परिवार भी अब पैसे के हिसाब से जुड़े होते हैं।
जहाँ रिश्तों में सच्चाई और प्यार का कोई वजूद नहीं,
वहाँ केवल पैसे की अहमियत और स्वार्थ का जोर है।
परिवार का नाम लेकर लोग अब फायदे की बात करते हैं,
दिलों की सच्चाई को पैसे के रंग में रंग देते हैं।
रिश्तों की बात तो अब कोई करता नहीं,
यहाँ तो हर कोई पैसे के पीछे दौड़ता रहता है।
अब परिवार में भी सच्चे रिश्ते नहीं रहते,
यहाँ तो सब कुछ पैसों के हिसाब से तय होता है।
दिल से प्यार करने वाले अब कहीं नहीं मिलते,
हर रिश्ते में अब स्वार्थ और पैसे की ही उम्मीद होती है।
परिवार भी अब पैसों का ही गुलाम हो गया है,
सच्चे रिश्तों की कोई अहमियत अब नहीं रही है।
इस पैसे की दुनिया में रिश्ते भी अब बिकते हैं,
कोई सच्चा प्यार नहीं, सब कुछ पैसों से तौला जाता है।
अब परिवार की परवाह नहीं, हर कोई अपनी जेब भरता है,
रिश्तों में भी अब केवल स्वार्थ और पैसों का ही जिक्र रहता है।
इस मतलबी दुनिया में रिश्ते भी अब कामयाबी के पैमाने हैं,
दिल से जुड़ा कोई नहीं, हर किसी को पैसे की ही तलब है।
Family Selfish Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

रिश्ते अब दिल से नहीं, जेब से तोले जाते हैं,
इंसान नहीं, उसके पास क्या है — यही देखे जाते हैं।
अपनों का मतलब भी अब मतलब से होता है,
दिल की जगह अब दामन देखा जाता है।
जिस घर को हमने अपना समझा,
वहाँ भी प्यार से ज़्यादा पैसों का रुतबा चला।
खून के रिश्ते भी अब खून चूसने लगे हैं,
नाम परिवार का और काम मतलब के बने हैं।
घर में चेहरे अपने हैं, पर दिल पराए से लगते हैं,
बात करते हैं प्यार की, पर मतलब के सौदे करते हैं।
पैसा हो तो रिश्तेदार खुद चलकर आते हैं,
वरना याद तक करने से कतराते हैं।
जिनके लिए सब कुछ लुटाया,
उन्हीं ने दिल का सौदा किया, मुस्कुराया।
दुनिया अब रिश्तों से नहीं, रक़म से चलती है,
मतलब का तमाशा हर कोने में पलती है।
जो साथ थे बचपन में, अब दूर हैं पैसों से,
और जो पास हैं, वो भी अपने नहीं एहसासों से।
दिल टूटता है जब अपने भी पराए हो जाते हैं,
और जिन पर भरोसा हो, वही सवाल उठाते हैं।
पैसे की दौड़ में इंसान पीछे छूट गया,
रिश्तों की गर्माहट भी अब ठंडी सूट गया।
अपना कहने वाले भी अब गिनती करते हैं,
और हर एहसान को हिसाब की तरह भरते हैं।
ये जो परिवार है, अब पहचान सी रह गई है,
वक़्त और ज़रूरत के मुताबिक चलने की आदत बन गई है।
Money Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

इस दुनिया में अब इंसान नहीं, जेब की गूंज सुनी जाती है,
दिल का क्या है, बस नोटों से पहचान बनी जाती है।
मतलब निकलते ही रिश्ते बदल जाते हैं,
और पैसों के बिना तो अपने भी पराए हो जाते हैं।
यहाँ हर चेहरा मुस्कुरा रहा है दिखावे में,
असलियत तो दबी है किसी पैसे के बहाव में।
इंसान की क़ीमत अब दिल से नहीं,
बैंक बैलेंस से लगाई जाती है।
पैसा नहीं तो कोई पूछता नहीं,
और जब पैसा हो, तो सब झूठा रिश्ता भी सच्चा लगता है कहीं।
इस मतलबी दुनिया में रिश्ते बिकते हैं,
कुछ शब्दों में, कुछ नोटों की गड्डियों में सिसकते हैं।
अब इज्ज़त भी रुपए से मिलती है,
और प्यार भी शर्तों पर बिकती है।
इंसानियत का सौदा कर लिया है हमने,
पैसे के लिए ज़मीर गिरवी रख दिया है हमने।
रिश्ते अब दिल से नहीं जुड़ते,
कार्ड स्वाइप से तय होते हैं।
गरीब हो तो सच्चाई भी खटकती है,
और अमीर हो तो झूठ भी भा जाता है।
इस दौड़ में सब पैसे के पीछे भागते हैं,
कोई रिश्तों को कुचलता है, कोई जज़्बातों को।
यहाँ लोग हाल नहीं, हालात देखते हैं,
और पैसों से इंसान की औकात मापते हैं।
मतलबी हो चुकी है ये दुनिया सारी,
जहाँ इंसान नहीं, उसकी कमाई होती है प्यारी।
Matlabi Aukat Paise KI Duniya Hai Shayari

अब औक़ात नहीं देखी जाती इंसान की,
बस गिना जाता है कितना पैसा है उसकी जान की।
यहाँ सच बोलने वालों की कोई क़ीमत नहीं,
और झूठ बिकता है नोटों की तिजोरी में कहीं।
रिश्ते अब नहीं निभते प्यार से,
सब कुछ चलता है बस पैसों के व्यापार से।
तेरी औक़ात तेरे कपड़ों से नहीं,
तेरे वॉलेट की मोटाई से मापी जाती है यहीं।
मतलबी दुनिया में ईमानदारी गुनाह बन गई,
और दौलत ही अब खुदा बन गई।
जो झुकता है पैसों के आगे,
वही अब ऊँचा कहलाता है समाज के सांचे में भागे।
असली चेहरा अब तभी दिखता है,
जब जेब खाली होती है और साथ छूटता है।
यहाँ लोग इंसान नहीं, उसकी कमाई से प्यार करते हैं,
और मतलब निकलते ही नज़रें तक फेर लेते हैं।
औक़ात दिखाने का सबसे आसान तरीका है —
कुछ रुपये कम कर दो, सबकी असलियत सामने आ जाती है।
मतलबी रिश्ते आजकल ट्रेंड में हैं,
जहाँ मतलब नहीं तो याद भी नहीं रहते।
पैसा ही अब धर्म है, और लालच उसकी पूजा,
इंसानियत को बेचकर सबने बना ली अपनी दूजा दूजा।
इस ज़माने में मुफ़लिसी गुनाह है,
और दौलत बेशुमार हो तो बर्बादी भी वाह है।
औक़ात की बात करते हैं वो,
जो खुद मतलब के बिना बात नहीं करते।
Attitude Status Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

इस दुनिया में अब रिश्ता नहीं, रेट चलता है,
और औक़ात तेरी नहीं, तेरे नोटों से बनता है।
मतलबी लोगों से दूर रहो,
क्योंकि ये वही लोग हैं जो ज़रूरत पर ही याद करते हैं।
पैसा हो तो लोग सलाम भी झुककर करते हैं,
वरना पहचानते तक नहीं।
दिल साफ़ हो या न हो,
जेब भारी होनी चाहिए — यही है इस दुनिया की सोच।
मैं वो सिक्का नहीं जो हर किसी की जेब में आ जाऊं,
वक्त आएगा तो छाप छोड़ जाऊंगा।
शौक ऊँचे हैं और सोच अलग,
तभी तो पैसे वालों की भीड़ में अकेले चमकते हैं।
मतलबी दुनिया में खामोशी ही सबसे बड़ा जवाब है,
और ऐटिट्यूड ही सबसे बड़ा हथियार।
तेरे जैसे हज़ार देखे, जो मतलब के लिए पास आते हैं,
और जैसे ही काम निकल जाए, दूर हो जाते हैं।
औक़ात तो वो होती है जो बिना पैसे के भी असर करे,
और जुबान वो, जो सच बोले चाहे जितनी कड़वी लगे।
हम वही हैं जो मुसीबत में साथ छोड़ने वालों को नाम से नहीं, काम से पहचानते हैं।
दुनिया पैसे से नहीं, सोच से जीती जाती है,
और मेरी सोच तू खरीद नहीं सकता।
ऐटिट्यूड हमारा भी थोड़ा महँगा है,
मुफ़्त में तो सिर्फ़ नज़रे मिलती हैं।
आजमाना है तो हालात में कर,
क्योंकि भीड़ में तो अच्छे-अच्छे मतलब के हो जाते हैं।
Rishte Selfish Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

रिश्तों में अब वो सच्चाई नहीं रही,
हर चेहरा मुस्कराता है पर वफ़ा कहीं नहीं रही।
अब रिश्ते भी कारोबार हो गए हैं,
दिल नहीं, जेब देखकर तय हो गए हैं।
मतलब से शुरू, मतलब पर खत्म,
अब यही है रिश्तों का असली धर्म।
तेरे पास पैसा है, तू खास है,
नहीं तो तेरा नाम तक किसी को याद नहीं।
आजकल रिश्ते जरूरतों के हिसाब से बनते हैं,
और जैसे ही मतलब खत्म, चेहरे बदल जाते हैं।
खून के रिश्ते भी अब खून पीने लगे हैं,
इंसानियत नहीं, पैसा ही जीने लगे हैं।
जब तक जेब भारी थी, सब अपने थे,
खाली हुई तो सब सपने थे।
मतलबी दुनिया में सच्चे दिल की कोई कीमत नहीं,
यहाँ प्यार भी फायदे में तोला जाता है कहीं।
अब रिश्ते दिल से नहीं निभाए जाते,
हालात और हैसियत से चलाए जाते हैं।
मतलब के रिश्ते जब टूटते हैं,
तब असली अकेलापन शुरू होता है।
जिसको अपना समझा, उसने ही पराया कर दिया,
और पैसे को रिश्तों से बड़ा बताया कर दिया।
दुनिया की भीड़ में खो गए वो चेहरे,
जो सिर्फ़ काम आने तक अपने थे।
हर मुस्कराहट में प्यार नहीं होता,
और हर रिश्ता वफ़ादार नहीं होता।
Aukat Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

औक़ात की बात मत कर ए दुनिया,
तुझे तो बस पैसे वालों का सलाम अच्छा लगता है।
यहाँ इज़्ज़त नहीं दौलत बोलती है,
और औक़ात नहीं, जेब गिनती है।
अब रिश्ते औक़ात से तौले जाते हैं,
और प्यार भी पैसों में बोले जाते हैं।
औक़ात दिखाने का शौक मत पाल,
वक़्त सबकी तस्वीर और तक़दीर बदल देता है।
तमीज़ नहीं दिखती जब पैसा हाथ में हो,
और खुदगर्ज़ी जब रिश्तों के बीच बैठी हो।
मतलबी लोगों से दूर ही अच्छा है,
क्योंकि ये औक़ात देख कर ही रिश्ता निभाते हैं।
जेब खाली हो तो अपनों की भी ज़ुबान बदल जाती है,
और जब भर जाए, तो गैर भी सर झुका जाते हैं।
तू अपनी औक़ात मत भूल जाना,
ये मतलबी दुनिया तुझसे भी बड़ी चालाक निकलेगी।
यहाँ वो लोग इज़्ज़त पाते हैं जिनके पास रक़म है,
वफ़ा, सच्चाई और मेहनत अब सिर्फ़ किस्से बन गए हैं।
मत पूछ किस हाल में हैं,
ये दुनिया तो सिर्फ़ औक़ात देखकर ही सवाल करती है।
इस समाज में वही ऊँचा है जिसके पास पैसा है,
बाक़ी तो सब भीड़ में खोए चेहरों जैसे हैं।
औक़ात दिखाना आता है हमें भी,
बस फिजूल लोगों पर वक़्त नहीं खर्च करते।
पैसों की दुनिया में दिलों का क्या काम,
यहाँ तो रिश्ते भी बैंक बैलेंस देखकर तय होते हैं हर शाम।
Paisa Bolta Matlabi Paise KI Duniya Hai Shayari

अब जमाना दिल नहीं, दाम देखता है,
यहाँ हर रिश्ता सिर्फ़ पैसा देखकर टिकता है।
पैसा ही अब बोलता है सबसे ऊँची आवाज़ में,
बाक़ी सबकी सच्चाई दब जाती है मज़बूरी के राज़ में।
जिस जेब में खनक हो, वहाँ सब झुकते हैं,
और खाली हाथ वालों को तो लोग पहचानते भी नहीं।
सच्चाई अब नोटों में लिपटी मिलती है,
और इंसानियत भी बिकने लगी है महंगी बिल में कहीं।
पैसा नहीं है तो तेरी बातों में असर नहीं,
और अगर है, तो झूठ भी सच से कम नहीं।
रिश्ते अब दिल से नहीं, कार्ड स्वाइप से चलते हैं,
और इंसान अब बैलेंस शीट में गिने जाते हैं।
यहाँ हर चेहरा मुस्कुरा रहा है मजबूरी में,
क्योंकि पैसे के बिना कोई नहीं चलता है दूरी में।
जो दिखता है, वही बिकता है,
और जो अमीर है, वही सबकी नजरों में टिकता है।
पैसा बोलता है, इसलिए सच चुप रहता है,
और ज़मीर तो अब तिजोरी में कैद रहता है।
अब जुबान मीठी नहीं, जेब भारी होनी चाहिए,
तभी तो तेरी बात सुनी जाएगी, वरना तुच्छ समझी जाएगी।
लोग अब चेहरे नहीं, चेक बुक देखते हैं,
और दिल नहीं, डेबिट कार्ड के डिज़ाइन से इश्क़ करते हैं।
पैसे की दुनिया में रिश्ते भी मुनाफ़े से जोड़े जाते हैं,
और मोहब्बत भी क़िस्तों में तोड़ी जाती है।
जब तक पैसा है, तू सबसे प्यारा है,
वरना तेरा नाम भी किसी को दुबारा याद नहीं आता।
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