Here I am Exploring the Wisdom of Karma Quotes from the Bhagavad Gita Karma Quotes in Hindi. The Bhagavad Gita, one of the most revered scriptures in Hindu philosophy, offers profound teachings on Karma (action) that are timeless and universal. These teachings emphasize selfless action, duty without attachment to results, and inner balance. Many of these karma quotes, when read in Hindi, resonate deeply with the heart and soul of Indian spiritual seekers.
One of the most famous karma quotes from the Gita is:
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥”
(Chapter 2, Verse 47)
Translation: “You have the right to perform your actions, but not to the fruits of those actions. Never be attached to the results, and never be inactive.”
This quote teaches us the essence of Nishkama Karma – performing our duties diligently without obsessing over success or failure.
Another impactful line is:
“योगः कर्मसु कौशलम्” – “Yoga is skill in action.”
This reminds us that true spirituality lies not just in rituals, but in mindful, efficient, and ethical action in daily life.
Bhagavad Gita’s karma quotes in Hindi carry a rhythm and cultural depth that make them even more relatable and inspiring. They continue to guide millions toward a life of purpose, detachment, and inner peace.
Bhagavad Gita Karma Quotes in Hindi

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। -
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
नियत कर्म को करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्म करना श्रेष्ठ है। -
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
कर्म करो और फल की आसक्ति त्याग दो – यही योग है। -
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः।
अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः॥
कर्म, विकर्म और अकर्म – इन सभी को समझना आवश्यक है। -
तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्।
भवामि नचिरात् पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥
जो मन से मुझे समर्पित हैं, मैं उन्हें मृत्यु के सागर से पार कराता हूँ। -
यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।
यज्ञ (कर्तव्य) के लिए किए कर्म ही मुक्त करते हैं, अन्यथा कर्म बंधन बन जाते हैं। -
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥
सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय – सब में सम भाव रखो और कर्म करो। -
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥
बुद्धियुक्त कर्मयोगी पाप और पुण्य दोनों से ऊपर उठ जाता है। -
श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥
जो श्रद्धा और संयम से कर्म करता है, वह ज्ञान पाकर परम शांति को प्राप्त करता है। -
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥
कोई भी क्षणभर भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता – प्रकृति से कर्म होता ही है। -
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥
अपने धर्म में मरना भी श्रेयस्कर है, दूसरों का धर्म भय उत्पन्न करता है। -
यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः।
आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते॥
जो अपने आत्मा में ही रमण करता है, आत्मतृप्त है – उसके लिए कोई कर्म शेष नहीं रहता।
Heart Touching Karma Bhagavad Gita Quotes in Hindi

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म करने में है, फल में नहीं। -
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि।
कभी भी कर्म के फल की इच्छा मत करो और अकर्म में आसक्त मत बनो। -
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
हे अर्जुन! आसक्ति त्याग कर योग में स्थित होकर कर्म कर। -
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
बुद्धि से युक्त कर्मयोगी पाप-पुण्य दोनों को त्याग देता है। -
योगः कर्मसु कौशलम्।
कर्म में निपुणता ही योग है। -
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
अपने नियत कर्तव्य को अवश्य करो, कर्म अकर्म से श्रेष्ठ है। -
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।
अपने धर्म में मरना भी श्रेष्ठ है, दूसरे का धर्म भय पैदा करता है। -
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समत्व रखो और युद्ध करो। -
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कोई भी एक क्षण भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता। -
यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।
यज्ञ (कर्तव्य) के लिए किए कर्म ही मुक्त करते हैं, अन्यथा कर्म बंधन बन जाता है। -
जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है वो भी अच्छा हो रहा है।
जो होगा वो भी अच्छा ही होगा – सब कुछ कर्म और विश्वास पर आधारित है। -
तू कर्म कर, क्योंकि कर्म ही तेरा धर्म है।
फल की चिंता छोड़, क्योंकि वह ईश्वर के अधीन है। -
कर्म कर, परन्तु उससे बंध मत।
आसक्ति से किया गया कर्म बंधन लाता है। -
सच्चा कर्म वही है जो बिना स्वार्थ के किया जाए।
निस्वार्थ कर्म ही मोक्ष की ओर ले जाता है। -
मन को जीतना सबसे बड़ा कर्म है।
क्योंकि वही हर कार्य की जड़ है।
Bhagavad Gita Karma Mahabharat Quotes in Hindi

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“कर्म करो, फल की चिंता मत करो।”
– श्रीकृष्ण (भगवद गीता 2.47) -
“जिस प्रकार अग्नि ईंधन को भस्म कर देती है, उसी प्रकार ज्ञान कर्म के फलों को नष्ट कर देता है।”
– भगवद गीता 4.37 -
“मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है, जन्म से नहीं।”
– महाभारत -
“जो कर्म आज कर सकता है, उसे कल पर मत टालो।”
– महाभारत का संदेश -
“न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”
– त्याग ही अमरता की राह है। -
“कर्म का फल तात्कालिक नहीं होता, परंतु अचूक होता है।”
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“बुद्धि से युक्त कर्म करने वाला पाप और पुण्य दोनों से मुक्त हो जाता है।”
– भगवद गीता 2.50 -
“जो अपने धर्म में स्थित रहता है, वही सच्चा योद्धा है।”
– श्रीकृष्ण, महाभारत -
“जब अधर्म बढ़ता है, तब मैं धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेता हूँ।”
– श्रीकृष्ण (भगवद गीता 4.7) -
“जो अपने कर्म में रत है, वही योगी है।”
– गीता 6.1 -
“जिसका चित्त अडोल है, वही व्यक्ति सच्चे ज्ञान को प्राप्त करता है।”
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“कर्म किए बिना कोई व्यक्ति शरीर की रक्षा भी नहीं कर सकता।”
– गीता 3.8 -
“कर्म का मार्ग ही मोक्ष का मार्ग है, यदि उसे आसक्ति रहित किया जाए।”
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“अपने कर्मों में विश्वास रखो, ईश्वर तुम्हारे साथ न्याय करेगा।”
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“हर कर्म एक बीज है, और हर बीज एक फल देता है।”
Inspirational Karma Bhagavad Gita Quotes in Hindi

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“कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर।”
— श्रीकृष्ण (भगवद गीता 2.47) -
“जो जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल पाता है।”
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“कर्म योग ही सच्चा योग है। कर्म में ही मुक्ति है।”
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“तू अपना कर्म करता जा, परिणाम की चिंता भगवान पर छोड़ दे।”
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“सच्चा योगी वही है जो कर्म करते हुए भी शांत रहता है।”
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“अपने धर्म का पालन करते हुए किया गया कर्म कभी निष्फल नहीं जाता।”
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“अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं।”
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“जो कर्म का त्याग करता है, वही सच्चा ज्ञानी है।”
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“कर्म वही सच्चा है, जो किसी स्वार्थ के बिना किया जाए।”
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“कर्म करते रहो, क्योंकि कर्म ही जीवन है।”
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“जो कर्म से भागता है, वह जीवन की सच्चाई से भागता है।”
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“हर मनुष्य अपने कर्मों का निर्माता है।”
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“भगवान सिर्फ कर्म देखता है, फल तो वह अपने समय पर देता है।”
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“कर्म करने से डरना नहीं चाहिए, उसे ईमानदारी से करना चाहिए।”
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“जीवन में सफलता का रास्ता कर्म से होकर ही जाता है।”
Motivational Karma Bhagavad Gita Quotes in Hindi

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“कर्म करो, क्योंकि कर्म ही तुम्हारा धर्म है।”
— श्रीकृष्ण (भगवद गीता 2.47) -
“फल की चिंता मत कर, बस अपने कर्म में लग जाओ।”
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“हर इंसान अपने कर्मों से ही महान बनता है, जन्म से नहीं।”
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“कर्म ही जीवन की दिशा तय करता है।”
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“जो कर्म करता है, वही सफलता पाता है।”
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“आलस्य सबसे बड़ा शत्रु है, कर्म सबसे बड़ा मित्र।”
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“कर्म ही व्यक्ति का असली परिचय है।”
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“जो बिना किसी अपेक्षा के कर्म करता है, वही सबसे बड़ा योगी है।”
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“नियत कर्म करते रहो, क्योंकि यही तुम्हारा भविष्य बनाता है।”
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“समय से पहले और भाग्य से ज़्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता – इसलिए निरंतर कर्म करो।”
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“कठिन समय में भी कर्म से मत हटो, यही तुम्हें पार लगाएगा।”
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“कर्म ही सफलता की पहली सीढ़ी है।”
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“सच्चा जीवन वही है, जिसमें कर्म हो, स्वार्थ नहीं।”
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“कर्म का फल देर से मिलता है, लेकिन मिलता ज़रूर है।”
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“जो इंसान अपने कर्म से पीछे नहीं हटता, वह कभी असफल नहीं होता।”
Bhagavad Gita Quotes on Karma in Hindi

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“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥“
(अध्याय 2, श्लोक 47)
👉 “तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं।” -
“योगः कर्मसु कौशलम्।”
(अध्याय 2, श्लोक 50)
👉 “कर्म में कुशलता ही योग है।” -
“न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।”
(अध्याय 3, श्लोक 5)
👉 “कोई भी व्यक्ति क्षणभर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता।” -
“सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।”
(अध्याय 2, श्लोक 48)
👉 “सफलता और असफलता में समभाव रखना ही योग है।” -
“यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।”
(अध्याय 3, श्लोक 9)
👉 “यज्ञ (निष्काम भाव) के लिए किए गए कर्म ही बंधन से मुक्त करते हैं।” -
“कर्मणा जायते जीवो, कर्मेणैव विलीयते।”
👉 “कर्म से ही जीव की उत्पत्ति होती है और कर्म से ही उसका अंत।” -
“कर्म ही पूजा है, यदि उसे श्रद्धा और ईमानदारी से किया जाए।”
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“मनुष्य अपने कर्मों से ही देवता या राक्षस बनता है।”
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“भगवान कर्म देखता है, बहाना नहीं।”
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“जो व्यक्ति बिना फल की आशा के कर्म करता है, वही सच्चा भक्त है।”
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“कर्म पथ ही मोक्ष पथ है।”
Self Realization Bhagavad Gita Karma Quotes in Hindi

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“कर्म ही योग है, जब वह अहंकार रहित और आत्मज्ञान से युक्त हो।”
(अध्याय 3) -
“आत्मा को कोई मार नहीं सकता, न ही आत्मा मरती है — कर्म से यह ज्ञान मिलता है।”
(अध्याय 2, श्लोक 20) -
“जो आत्मा को जान लेता है, वह कर्म से बंधता नहीं।”
(अध्याय 4, श्लोक 14) -
“अपने वास्तविक स्वरूप को जानने वाला व्यक्ति निष्काम कर्म करता है।”
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“आत्मज्ञानी कर्म करता है, लेकिन उसके कर्म उसे बाँधते नहीं।”
(अध्याय 4, श्लोक 20) -
“जैसे अग्नि लकड़ी को भस्म कर देती है, वैसे ही आत्मज्ञान सारे कर्मों को भस्म कर देता है।”
(अध्याय 4, श्लोक 37) -
“जो आत्मा को समझता है, वह न सुख में डोलता है न दुख में।”
(अध्याय 2, श्लोक 15) -
“सच्चा ज्ञान वही है, जो आत्मा और कर्म के रहस्य को समझता है।”
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“आत्मा न कभी जन्म लेती है, न मरती है — कर्म केवल देह को प्रभावित करते हैं।”
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“कर्म करते रहो, लेकिन अपने आप को कर्ता न मानो — यही आत्मसाक्षात्कार की दिशा है।”
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“योगस्थ होकर कर्म करो, समत्व बुद्धि अपनाओ — यही आत्मा का मार्ग है।”
(अध्याय 2, श्लोक 48) -
“जब आत्मा का बोध होता है, तब सभी कर्म निष्कलंक हो जाते हैं।”
Bhagavad Gita Karma Bhagavad Gita Quotes in Hindi

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🔹 “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥”**
(अध्याय 2, श्लोक 47)
👉 “तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल पर नहीं।” -
🔹 “योगः कर्मसु कौशलम्।”
(अध्याय 2, श्लोक 50)
👉 “कर्म में कुशलता ही योग है।” -
🔹 “न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।”
(अध्याय 3, श्लोक 5)
👉 “कोई भी व्यक्ति क्षणभर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता।” -
🔹 “कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।”
(अध्याय 2, श्लोक 51)
👉 “ज्ञानी व्यक्ति फल की इच्छा त्यागकर कर्म करते हैं।” -
🔹 “यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।”
(अध्याय 3, श्लोक 9)
👉 “यज्ञ (निष्कामता) के लिए किया गया कर्म ही बंधन से मुक्त करता है।” -
🔹 “सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।”
(अध्याय 2, श्लोक 48)
👉 “सफलता और असफलता में समभाव रखना ही सच्चा योग है।” -
🔹 “कर्म ही पूजा है, अगर वह समर्पण भाव से किया जाए।”
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🔹 “जो व्यक्ति बिना फल की अपेक्षा के कर्म करता है, वही सच्चा योगी है।”
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🔹 “अपने धर्म का पालन करना ही सच्चा कर्म है।”
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🔹 “कर्म से भागने वाला कभी शांति नहीं पा सकता।”
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🔹 “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।”
(अध्याय 3, श्लोक 35)
👉 “अपने धर्म में मरना भी श्रेष्ठ है, पराया धर्म भय देने वाला है।” -
🔹 “बिना कर्म के जीवन निष्फल है।”
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🔹 “कर्म करते रहो, क्योंकि यही आत्मा की गति है।”
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🔹 “सच्चा ज्ञान वही है, जो कर्म को समझे और उससे न बंधे।”
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🔹 “भगवान सिर्फ कर्म देखता है, बहाने नहीं।”
Lord Krishna Quotes in Hindi For Instagram

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🔹 “जो हुआ, अच्छा हुआ। जो हो रहा है, वह भी अच्छा हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।”
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🔹 “मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। जैसा वह विश्वास करता है, वैसा वह बन जाता है।”
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🔹 “कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर।”
(कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन) -
🔹 “प्रेम में अहंकार नहीं होता और जहाँ अहंकार है, वहाँ प्रेम नहीं टिकता।”
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🔹 “समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नहीं मिलता।”
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🔹 “जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उदय होता है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ।”
(यदा यदा हि धर्मस्य…) -
🔹 “जो व्यक्ति हर परिस्थिति में शांत रहता है, वही सबसे बड़ा विजेता होता है।”
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🔹 “संसार की हर चीज़ नाशवान है, केवल आत्मा अमर है।”
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🔹 “तू मुझमें लीन हो जा, मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा।”
(सर्वधर्मान परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज) -
🔹 “जो अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चा योद्धा है।”
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🔹 “मोह ही सबसे बड़ा बंधन है, जो ज्ञान को ढक देता है।”
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🔹 “जो अपने कर्तव्यों को समझ कर कर्म करता है, वही मेरा प्रिय भक्त है।”
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🔹 “अहंकार, ईर्ष्या और घृणा – ये तीनों आत्मविनाश के रास्ते हैं।”
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🔹 “मुझे पाना है तो मन को वश में करो और इंद्रियों को संयमित करो।”
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🔹 “एकाग्रता ही सबसे बड़ा योग है। ध्यान से ही आत्मा का साक्षात्कार होता है।”
Sanskrit Karma Bhagavad Gita Quotes in Hindi

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🔹 “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥”
(अध्याय 2, श्लोक 47)
👉 “तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल पर नहीं। कर्म का फल कभी नहीं सोचो, कर्म करते रहो।” -
🔹 “योगः कर्मसु कौशलम्।”
(अध्याय 2, श्लोक 50)
👉 “कर्म में कुशलता ही योग है।” -
🔹 “न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।”
(अध्याय 3, श्लोक 5)
👉 “कोई भी व्यक्ति क्षणभर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता।” -
🔹 “कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
निर्ममाश्चिर्व्यायं च सर्वे कर्मफलासहितः॥”
(अध्याय 2, श्लोक 51)
👉 “ज्ञानी व्यक्ति फल की इच्छा त्यागकर कर्म करते हैं।” -
🔹 “यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।
तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसंगः समाचर।”
(अध्याय 3, श्लोक 9)
👉 “यज्ञ (निष्कामता) के लिए किया गया कर्म ही बंधन से मुक्त करता है।” -
🔹 “कर्म ही पूजा है, अगर वह समर्पण भाव से किया जाए।”
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🔹 “जो व्यक्ति बिना फल की अपेक्षा के कर्म करता है, वही सच्चा योगी है।”
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🔹 “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।”
(अध्याय 3, श्लोक 35)
👉 “अपने धर्म में मरना भी श्रेष्ठ है, पराया धर्म भय देने वाला है।” -
🔹 “आत्मज्ञान से कर्मों को जानने वाला व्यक्ति निर्भीक होता है।”
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🔹 “जो समर्पण से कर्म करता है, वह सर्वोत्तम है।”
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🔹 “सच्चा कर्म वही है, जो आत्मा के उद्देश्य से किया जाए।”
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🔹 “निर्वैरित्वं, स्वधर्मे आस्थां और कर्मयोग की शक्ति को पहचानना चाहिए।”
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🔹 “कर्म से भागने वाला कभी शांति नहीं पा सकता।”
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🔹 “तुम कर्म करो, लेकिन अपने आप को कर्ता न मानो — यही आत्मसाक्षात्कार की दिशा है।”
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🔹 “जैसे अग्नि लकड़ी को भस्म कर देती है, वैसे ही आत्मज्ञान सारे कर्मों को भस्म कर देता है।”
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Mahadev Quotes In Hindi 2 Line
